बैंकों में सुविधा शुल्क लेकर लोन देने का आरोप, जांच की मांग तेज Indian 24 Circle News

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बैंकों में सुविधा शुल्क लेकर लोन देने का आरोप, जांच की मांग तेज

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जौनपुर। वर्तमान समय में बैंकों से ऋण प्राप्त करना जहां एक ओर आम नागरिकों के लिए सरकारी नीतियों के अनुसार सरल बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। आरोप है कि बैंकों में दलालों के माध्यम से या प्रत्यक्ष रूप से बैंक अधिकारियों को कमीशन और सुविधा शुल्क देकर आसानी से लोन प्राप्त किया जा सकता है। यदि आवेदक कथित रूप से मांगी गई रकम देने को तैयार हो, तो उसकी फाइल तेजी से आगे बढ़ती है, अन्यथा उसे महीनों तक चक्कर लगाने पड़ते हैं।

इसी संदर्भ में Punjab National Bank की एनवाई रोड शाखा के विरुद्ध एक खाता धारक शबीहुल हसन ने गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने अपनी शिकायत Reserve Bank of India की कानपुर शाखा के बैंकिंग लोकपाल, बैंक के मंडल कार्यालय तथा मिशन रिमूव करप्शन के संचालक को भेजी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संतोषजनक क्रेडिट स्कोर, अच्छा फीडबैक और भुगतान क्षमता होने के बावजूद उन्हें ऋण प्रदान नहीं किया गया।

इसी प्रकार की एक अन्य शिकायत Punjab National Bank की खजुरा शाखा के प्रबंधक के विरुद्ध भी सामने आई है। एक ऋण अभ्यर्थी ने बैंक के शीर्ष अधिकारियों को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि बड़े पैमाने पर सुविधा शुल्क लेकर ऋण स्वीकृत किए जा रहे हैं, जबकि योग्य आवेदकों को अनावश्यक रूप से टाल दिया जाता है।

इन शिकायतों के आधार पर मिशन रिमूव करप्शन के संचालक वकार हुसैन ने मुख्य ग्राहक सेवा अधिकारी, नई दिल्ली तथा Reserve Bank of India के लोकपाल को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि जब केंद्र सरकार आम जनता को सुलभ ऋण उपलब्ध कराने के लिए सरल और अनुकूल नीतियां बना रही है, तब भी ईमानदार ग्राहकों को लोन से वंचित क्यों किया जा रहा है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कथित रूप से धोखाधड़ी करने वाले लोगों को बड़ी धनराशि का ऋण अल्प समय में स्वीकृत कर दिया जाता है, जबकि पुराने और विश्वसनीय ग्राहकों को मामूली राशि के लिए भी महीनों दौड़ाया जाता है। इससे बैंकों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

मामले को लेकर जनपद में चर्चा तेज है और लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता कायम रह सके और आम नागरिकों का विश्वास बना रहे।


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