खिचड़ी पर्व पर पत्रकारों का क्रिकेट मैच, चाइनीज़ मांझे से मृत लोगों को दी गई श्रद्धांजलि Indian 24 Circle News

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खिचड़ी पर्व पर पत्रकारों का क्रिकेट मैच, चाइनीज़ मांझे से मृत लोगों को दी गई श्रद्धांजलि

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शिया कॉलेज मैदान में खेल और संवेदना का अनोखा संगम, दो मिनट का मौन रखकर दी गई श्रद्धांजलि

जौनपुर। जनपद में खिचड़ी पर्व के अवसर पर शिया कॉलेज के मैदान में पत्रकारों के बीच एक मैत्रीपूर्ण क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया। इस आयोजन की खास बात यह रही कि मैच शुरू होने से पहले चाइनीज़ मांझे की चपेट में आकर जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए सभी पत्रकारों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस खेल आयोजन में जनपद के प्रमुख पत्रकारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। दो टीमों का गठन किया गया, जिसमें पत्रकार अजीत सिंह, देवेंद्र खरे, सैयद हसनैन क़मर दीपु, दीपक सिंह, राजन मिश्रा, सुशील तिवारी, बृजेश मिश्रा, आबिश इमाम सनी, इमरान अब्बास, काजू सिंह, दीपक श्रीवास्तव, मसूद, असलम परवेज, आलोक सिंह, सरस सिंह, अंकित श्रीवास्तव, दानिश इकबाल, बख्तियार आलम, आमिर अब्बास सहित अन्य पत्रकारों ने मैदान में खेल भावना का परिचय देते हुए मैच खेला।

वहीं जो पत्रकार मैच में शामिल नहीं हो सके उन्होंने मैदान के बीच बैठकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। दर्शक दीर्घा में मौजूद पत्रकार साथियों में सुनील सिंह, बृजेश भोले, रशीद, शब्बीर हैदर अम्मार,तबरेज नियाज़ी सहित कई पत्रकार शामिल रहे, जिन्होंने तालियों और उत्साह के साथ खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया।

मैच के दौरान अंपायर की भूमिका मास्टर असगर मेंहदी खान एवं सलमान शेख ने निभाई। आयोजनकर्ता की भूमिका वरिष्ठ पत्रकार सैयद अब्बास ने निभाई, जिनके प्रयासों से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार अनिल पाण्डेय ने पत्रकारों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए चाइनीज़ मांझे के खिलाफ समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होने की अपील की तथा चाइनीज़ मांझे से हुई मौतों पर सभी ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

मैच समाप्त होने के बाद सभी पत्रकारों ने एक साथ खिचड़ी भोजन कर पर्व का आनंद लिया और आपसी सौहार्द का परिचय दिया। इस अवसर पर यातायात प्रभारी सुशील मिश्रा भी उपस्थित रहे और उन्होंने मैदान में खेल रहे पत्रकारों का उत्साह बढ़ाया।

यह आयोजन न केवल खेल भावना को बढ़ावा देने वाला रहा, बल्कि सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाओं का भी सशक्त संदेश दे गया। 


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